भोपाल में फिशरीज कॉन्क्लेव, सीएम ने लाभार्थियों को प्रमाण-पत्र बाँटे
डॉ अनवर खान, एमके न्यूज़,
भोपाल. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय फिशरीज इन्वेस्टर्स एंड एक्सपोर्टर्स कॉन्क्लेव-2026 में जलाशय और अमृत सरोवर के एकीकृत विकास परियोजना के विकास की स्वीकृति हस्तांतरित की गई। मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह तथा केंद्रीय राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल ने कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कॉन्क्लेव का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। इस दौरान अंतर्देशीय राज्यों की मत्स्य निर्यात क्षमता बढ़ाने के लिए तैयार मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का भी सिंगल क्लिक के माध्यम से विमोचन किया गया।
जलाशय और अमृत सरोवर के विकास को मंजूरी
मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्री राजीव रंजन सिंह ने जलाशय और अमृत सरोवर के एकीकृत विकास परियोजना के विकास की स्वीकृति हस्तांतरित की। इस अवसर पर मत्स्य पालन क्षेत्र से जुड़े हितग्राहियों को प्रोत्साहित करने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड, मत्स्य सहकारी समितियों, स्टार्टअप्स और प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना के तहत चयनित लाभार्थियों को प्रमाण-पत्र भी वितरित किए गए।
मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने पर जोर
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि इस आयोजन से मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने, रोजगार के नए अवसर सृजित करने और मध्य प्रदेश को अंतर्देशीय मत्स्य उद्योग का प्रमुख केंद्र बनाने के प्रयासों को गति मिलेगी। राज्य सरकार प्रदेश की जल संपदा को निवेश, आधुनिक प्रसंस्करण और निर्यात से जोड़कर मत्स्य पालन क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में लगातार काम कर रही है।
सिंचाई क्षेत्र को 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2002-03 तक मध्य प्रदेश में केवल 7.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा थी, जो अब बढ़कर करीब 67 लाख हेक्टेयर हो गई है। सरकार का लक्ष्य इसे 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाना है। इससे किसानों की समृद्धि के साथ मत्स्य पालन को भी नई गति मिलेगी। इसी दिशा में राज्य सरकार ने मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए 1 लाख केज स्थापित करने का लक्ष्य तय किया है।
जल संसाधनों को आजीविका और आर्थिक विकास से जोड़ने की तैयारी
मुख्यमंत्री यादव ने मत्स्य पालन क्षेत्र की व्यापक आर्थिक संभावनाओं पर जोर देते हुए कहा कि राज्य का लक्ष्य मत्स्य पालन की वैल्यू चेन को मजबूत करना है। इसके जरिए जल संसाधनों को बेहतर आजीविका के अवसरों और आर्थिक विकास में बदला जाएगा। सरकार उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण और निर्यात तक पूरे क्षेत्र को मजबूत करने पर जोर दे रही है।
निवेशकों और निर्यातकों ने तलाशे विस्तार के अवसर
कॉन्क्लेव में मत्स्य उद्योग से जुड़े हितधारकों, निवेशकों और निर्यातकों ने एक मंच पर आकर उत्पादन, प्रसंस्करण और बाजार संपर्कों के विस्तार की संभावनाओं पर चर्चा की। मध्य प्रदेश में छोटे-बड़े जलाशयों की व्यापक उपलब्धता को देखते हुए सरकार मत्स्य पालन से जुड़े कारोबार को विस्तार देने और इससे जुड़े लोगों की आय बढ़ाने पर जोर दे रही है। साथ ही मत्स्य पालन को उद्योग के रूप में विकसित करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।






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