नाराज किसानों ने पार्वती नदी में फेंकी लहसुन बोरियां
कपिल सूर्यवंशी, MK NEWS
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सीहोर। क्षेत्र में लहसुन की बंपर उत्पादन होने के बाद भी किसान परेशान हैं। क्योंकि किसानों को मंडियों में लहसुन के उचित दाम नहीं मिल पा रहे हैं। व्यापारी 200 से लेकर 400 रूपए प्रति क्वींटल के हिसाब से किसानों से लहसुन खरीद रहे हैं। अपनी उपज के उिचत दाम नहीं मिलने से हताश होकर किसान नदियों में और सडकों पर लहसुन फेंक रहे हैं। श्यामपुर के ग्राम हिंगोनी के किसानों ने लहसुन से भरी दर्जनों बोिरयां पार्वती नदी में फेंक कर अपना विरोध जताया वहीं जावर क्षेत्र के किसानों ने लहसुन और प्याज की माला पहनकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।
उल्लेखनीय है की जिले में लहसुन और प्याज का अच्छा उत्पादन होता है। बीते कुछ
सालों में जिले में लहसुन और प्याज का रकबा बढा है। इस वर्ष लहसुन की बंपर उत्पादन
हुई है लेकिन मंडियों में लहसुन कोडियों के दाम व्यापारी खरीद रहे हैं। ग्राम फूलमोगरा
के किसान जमशेद खान ने बताया कि व्यापारी मंडियाे में 1 से लेकर 4 रूपए किलो
लहसुन खरीद रहे हैं ऐसे में मंडी आने पर किसानों की लागत तक नहीं निकल पा रही हैं।
एक क्वींटल फसल की लागत करीब 3 से 4 हजार रूपए के बीच किसान को आती है। डीजल के दाम
भी अधिक हैं ऐसे में किसान को मंडी आने में काफी नुकसान है।
- लहसुन का बंपर उत्पादन फिर भी फेंकने को मजबूर किसान
- मंडियों में नहीं मिल रहे उचित दाम, लागत निकलना भी मुश्किल
- नाराज किसानों ने पार्वती नदी में फेंकी लहसुन बोरियां
- जावर के किसानों ने लहसुन- प्याज की माला पहनकर जताया विरोध
- बोले किसान करेंगे विधायक सांसद के घरों का घेराव
लहसुन के उिचत दाम नहीं मिलने से नाराज जावर क्षेत्र के किसानों ने विरोध जताया। किसान सूर्यपाल सिंह ठाकुर के नेतृत्व में सभी किसानों ने मिलकर जावर तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान कजलास, जीवापुर मवडिया ,बिशुखेड़ी, और कुंडिया नाथू के किसान मौजूद थे । वही ज्ञापन वाचन में सूर्यपाल सिंह ठाकुर ने कहा आज किसान अपनी फसल के उचित मूल्य प्राप्त करने के लिए तरस रहा है किसान अपना पेट नहीं भरता किसान तो पूरे प्रदेश और देश की जनता का पेट भरता है लेकिन किसान आज पूरी तरह बर्बाद हो रहा है हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मांग है कि कृषि उपज लहसुन एवं प्याज का निर्यात तुरंत प्रभाव से लागू करवाए या भावांतर योजना या राजस्थान की तर्ज पर बाजार हस्तक्षेप योजना को लागू करवाएं इसके संबंध में मध्यप्रदेश शासन को भी प्रस्ताव पास कर केंद्र को भेजी जानी चाहिए ।
आज किसान खेती छोड़ जमीन बेचने पर मजबूर
किसानों को अपनी फसल मंडी तक ले जाने का भाड़ा भी नहीं निकल पा रहा है । आज
किसान खेती छोड़ जमीन बेचने पर मजबूर हो रहा है सरकार के झूठे वादे एवं जुमले किसानों
की आय दोगुनी करने के खोखले साबित हो रहे हैं आय दुगनी तो नहीं हुई बल्कि खाद बीज व
रासायनिक दवाइयां दुगनी हो गई हैं। कृषि लागत बढ़कर डबल हो गई किसानों को अपनी उपज
का उचित रखरखाव भी नहीं मिल पा रहा है गांव तहसील स्तर पर भी प्याज एवं लहसुन के भंडारण
के शासकीय स्तर पर कोई व्यवस्था नहीं है किसान अपना धैर्य खोता जा रहा है। जहां सरकार
एक और स्मार्ट सिटी, मिनी सिटी बनाने की बात कर रही है लेकिन भारत की 70 प्रतिशत जनसंख्या
जो भी कृषि पर आधारित है । वह अपनी मूलभूत सुविधा से कोसों दूर होता जा रहा है । उक्त
फसल का उचित दाम दिलाया जाए अन्यथा जिले के विधायक और सांसद का घरों का घेराव किया
जाएगा आवश्यकता हुई तो विधानसभा का घेराव करने में भी परहेज नहीं करेंगे ।
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